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भारत 2.0 : अध्याय 1.1
द वायरलेस वुमन कलकत्ता, 14 अगस्त 1942 ◆ लीला मुखर्जी ने भविष्य को पहली बार दो मृत पुरुषों की बहस के रूप में सुना। एक आवाज़ डायमंड हार्बर के ब्रिटिश जिला नियंत्रक की थी, जो भूमिगत अख़बारों के अनुसार तीन सप्ताह पहले मर चुका था। दूसरी आवाज़ रंगून के पार कहीं से प्रसारण कर रहे एक जर्मन सिग्नल अधिकारी की थी। वे मौसम के गुब्बारों के लिए सुरक्षित आवृत्ति पर उस कूटभाषा में बात कर रहे थे, जिसे इम्पीरियल टेलीग्राफ सर्विस से इस्तीफ़ा देने से पहले लीला ने तैयार करने में मदद की थी। वह बऊब


भंडारघर की छींक और अनुमति का नीला दरवाज़ा
सारांश: नीरा को बोलने वाली छतरी मिलती है, वह जादुई संदूक में गिरती है और विचित्र सरकारी नियमों में फँसे नीले दरवाज़े के सामने साहस से खड़ी होती है। जिस दिन मैंने उल्टो-पुल्टो-लोक की खोज की, उस दिन मुझे दादी का भंडारघर साफ करने की सज़ा दी गई थी। सुबह ठीक नौ बजे माँ ने इतने शांत स्वर में फैसला सुनाया, मानो वे ऐसी न्यायाधीश हों जिन्होंने मेरी सभी अपीलें पहले ही सुनकर खारिज कर दी हों। “तुम छह दिनों से अपनी नीली गणित की कॉपी खोज रही हो,” माँ ने कहा। “शायद वह भंडारघर में तुम्हारी


लछुआड़
पहला अध्याय: लछुआड़ का अरण्य लछुआड़ के जंगल में जब पहली रोशनी ने प्रवेश किया, तो वह एक डरपोक आशीर्वाद की तरह पहुँची, हर एक पत्ते को छूते हुए अंधेरी शाखाओं को उनका अपना हरा शरीर प्रदान किया । यह कोई साधारण जंगल नहीं है, यह स्थान और समय की सीमाओं से परे एक ब्रह्मांडीय तीर्थ है। इस मरणासन्न ग्रह पर मीरा और रेहान—ये दो ही तीर्थयात्री जमीन पर सोए हुए थे, और वे मिट्टी से ऐसी विनम्रता के साथ उठे, मानो वे समझ गए हों कि किसी भी राजमहल ने कभी वास्तविक आश्रय का आविष्कार नहीं किया है




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