शारदीय उत्सव 2025 परंपरा, स्मृति और रचनात्मकता का एक जीवंत उत्सव है। दुर्गापूजा के बहाने यह संकलन हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और उन कहानियों से परिचित कराता है जो समाज, इतिहास, मिथक और आधुनिक जीवन के बीच से होकर गुजरती हैं।
इस पुस्तक में पाठकों को विभिन्न विधाओं का संगम मिलेगा—हास्य और व्यंग्य से लेकर रहस्य और रोमांच तक, पौराणिक आख्यानों से लेकर खेल और विज्ञान की प्रेरणादायक गाथाओं तक। यहाँ हर कहानी अपनी अलग शैली और स्वर में कही गई है, पर सब मिलकर एक साझा अनुभव रचती हैं—एक ऐसा अनुभव जो पाठकों को न केवल आनंदित करता है बल्कि सोचने पर भी मजबूर करता है ।
लेखक कल्लोल साहा ने इस संकलन के माध्यम से शारदीय परंपरा को आधुनिक संवेदनाओं से जोड़ा है। वे मानते हैं कि दुर्गापूजा केवल पूजा या पर्व नहीं है, बल्कि यह सामूहिकता और सांस्कृतिक स्मृति का उत्सव है। यही कारण है कि इस पुस्तक की हर कथा अपने आप में एक दर्पण है—जिसमें हम अपने समाज, अपने समय और अपनी पहचान को नए सिरे से देख सकते हैं|
शारदीय उत्सव 2025 परिवार और मित्रों के साथ साझा करने योग्य एक ऐसा उपहार है, जो हर पाठक को परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनाकर ले जाता है।
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