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महिला किसान को पहचान, खेती को नई दिशा

12 अक्टू॰
7 मिनट पठन

अन्नदा: जल-सुरक्षा, डिजिटल कृषि और लाभकारी बाज़ार का एक समन्वित रास्ता

लेखक: कल्लोल साहा | संस्थापक–निदेशक, डेवलपमेंट कनेक्ट्स


सुबह खेत में रोपाई करने वाली, सब्जियों की देखभाल करने वाली, पशुओं के लिए चारा जुटाने वाली और फसल बेचते समय मोलभाव करने वाली महिला के नाम पर अक्सर किसान का सरकारी रिकॉर्ड नहीं होता। कई योजनाओं में ‘किसान’ की पहचान भूमि के कागज़ से जुड़ जाती है, जबकि खेत में काम करने, सिंचाई का निर्णय लेने और बाज़ार का जोखिम उठाने वाला व्यक्ति कोई और हो सकता है। यह केवल सम्मान का प्रश्न नहीं है। इसी पहचान से प्रशिक्षण, सिंचाई सेवा, उत्पादक संपत्ति, ऋण और संस्थाओं में प्रतिनिधित्व के रास्ते खुलते या बंद होते हैं। पश्चिम बंगाल में महिला किसान की पहचान को कृषि विकास की मुख्य नीति बनाना इसलिए न्याय और आर्थिक विवेक, दोनों की माँग है।


महाराष्ट्र ने हाल में इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहल की है। 22 जुलाई 2026 को राजपत्र में प्रकाशित महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तीकरण अधिनियम, 2026 कृषि से जुड़ी पात्र वयस्क महिलाओं को पहचान देने की व्यवस्था करता है। खेती के साथ बटाई, पट्टे पर खेती, कृषि श्रम, पशुपालन, मत्स्यपालन और प्राथमिक प्रसंस्करण जैसे काम भी इसके दायरे में आते हैं। ग्राम सभा की जाँच, महिला किसान प्रमाणपत्र, अपील, डेटाबेस, राज्य कोष और संबंधित संस्थाओं के प्रावधान रखे गए हैं। परंतु प्रमाणपत्र भूमि का मालिकाना हक नहीं देता और किसी विशेष योजना का लाभ उसके अधिसूचित नियमों पर निर्भर रहता है। इस अंतर को स्पष्ट रखना किसी भी गंभीर सुधार की पहली शर्त है।


7 अक्टूबर 2026 तक महाराष्ट्र में 37,93,051 आवेदन और 895 ग्राम पंचायतों की ग्राम सभा प्रक्रिया के बाद 68,436 प्रमाणपत्र जारी होने की सूचना कृषि मंत्री के हवाले से प्रकाशित हुई। जारी प्रमाणपत्र कुल प्राप्त आवेदनों के लगभग 1.8 प्रतिशत थे। इसे अस्वीकृति की दर कहना गलत होगा, क्योंकि बहुत-से आवेदन उस समय प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में थे। इस आँकड़े के दो संदेश हैं। महिलाओं में औपचारिक किसान पहचान की माँग बहुत बड़ी हो सकती है, और लाखों आवेदन आने से पहले प्रशासनिक क्षमता, समयबद्ध निर्णय, शिकायत निवारण तथा अपील की तैयारी जरूरी है। महाराष्ट्र का अनुभव परिणामों के साथ क्रियान्वयन की बाधाएँ समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।


पश्चिम बंगाल की कृषि संरचना इस विषय को तत्काल प्रासंगिक बनाती है। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार लगभग 71.23 लाख कृषि परिवारों में 96 प्रतिशत छोटे और सीमांत हैं तथा औसत जोत केवल 0.77 हेक्टेयर है। शुद्ध फसल क्षेत्र लगभग 52.05 लाख हेक्टेयर और राज्य की फसल सघनता 184 प्रतिशत बताई गई है। परंतु राज्य का औसत हर जिले की वास्तविकता नहीं बताता। पश्चिम बंगाल त्वरित लघु सिंचाई विकास परियोजना के दूसरे चरण की कार्ययोजना में लगभग 18.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र एकफसली बताया गया है, जिसका करीब तीन-चौथाई पश्चिम के लेटराइट क्षेत्रों और तटीय पट्टी में है। इसलिए उत्पादन क्षमता के बावजूद बहुत-से परिवारों को पानी, उचित फसल, पूँजी और लाभकारी बाज़ार की एक साथ उपलब्धता नहीं मिलती।


पश्चिम बंगाल के पास पहले से कई उपयोगी संस्थागत आधार मौजूद हैं। विश्व बैंक समर्थित लघु सिंचाई परियोजना के पहले चरण में लगभग 67 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बनी और एक लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए, लेकिन परियोजना विवरण के अनुसार महिला लाभार्थियों की हिस्सेदारी केवल लगभग 17 प्रतिशत थी। दूसरे चरण में जल उपलब्धता और जल-उपयोगकर्ता समितियों को मजबूत करने पर काम चल रहा है। आनंदधारा के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर 1,16,701 महिला किसान और 8,831 सामुदायिक कार्यकर्ता दर्ज हैं। ये किसी नए प्रस्ताव की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि राज्य की पहले से निर्मित सामाजिक और प्रशासनिक पूँजी हैं। नई पहल का उद्देश्य इन्हें जोड़ना और छूटे हुए अवसरों को भरना होना चाहिए, न कि एक समानांतर व्यवस्था खड़ी करना।


इसी आधार पर मैं ‘अन्नदा’—महिला किसान जल-सुरक्षा, डिजिटल कृषि और एकीकृत मूल्य-शृंखला मिशन—पर राज्यस्तरीय विचार का आग्रह करता हूँ। वर्ष 2027 से 2032 के लिए प्रारंभिक अवधारणा में लगभग ₹1,850 करोड़ का संकेतात्मक निवेश, एक लाख महिला किसानों को सीधा सहयोग, लगभग 80 हजार हेक्टेयर कार्यक्रम क्षेत्र और करीब एक हजार महिला-नेतृत्व वाले सिंचाई तथा उत्पादन क्लस्टर प्रस्तावित हैं। ये स्वीकृत बजट, प्राप्त उपलब्धियाँ अथवा सुनिश्चित लाभ नहीं हैं। स्थानीय जल बजट, जिला-स्तरीय परामर्श, सामाजिक और पर्यावरणीय सुरक्षा, फसल अर्थशास्त्र और वित्तीय जाँच के बाद ही इन्हें अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।


अन्नदा का पहला कदम वास्तविक महिला किसान की पहचान का पारदर्शी प्रोटोकॉल हो। केवल भूमि स्वामी नहीं, बल्कि जो महिला वास्तव में खेती या कृषि उत्पादन का प्रबंधन करती है, उसे कार्यक्रम पात्रता का आधार मिले। राज्य पहले सीमित उद्देश्य वाला कार्यक्रम-स्तरीय रिकॉर्ड बना सकता है और आगे जरूरत के अनुसार कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर सकता है। ग्राम सभा, पंचायत, आनंदधारा की महिला संस्थाओं और कृषि कर्मचारियों की सहायता से सत्यापन तथा अपील की व्यवस्था हो। बटाईदार, विधवा कृषक, पशुपालन करने वाली और मत्स्य क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं को केवल इसलिए वंचित न होना पड़े कि जमीन उनके नाम नहीं है। साथ ही पहचान-पत्र को स्वामित्व, उत्तराधिकार अथवा पट्टेदारी बदलने वाला दस्तावेज़ न बताया जाए।


दूसरा परिवर्तन पानी की योजना को महिला किसान की वास्तविक जरूरत से जोड़ना है। पश्चिमी सूखे क्षेत्रों में जलग्रहण कार्य, तालाब मरम्मत, छोटे भंडारण, वैज्ञानिक भूजल आकलन और कुशल जल वितरण उपयोगी हो सकते हैं। तटीय क्षेत्रों में जलनिकासी, खारापन, मौसमी भंडारण और पानी की गुणवत्ता अलग प्राथमिकताएँ हैं। हर जगह एक ही सौर पंप, ड्रिप या नई संरचना लगाना वैज्ञानिक योजना नहीं है। पहले स्थानीय जल बजट और जलभूवैज्ञानिक परीक्षण हों; निर्माण से पहले संचालन, रखरखाव और समान जल-वितरण के नियम तय हों। अन्नदा का प्रस्ताव है कि समर्थित जल-उपयोगकर्ता संस्थाओं के कार्यकारी पदों में कम से कम आधी भागीदारी महिलाओं की हो और उन्हें जिम्मेदार तकनीकी तथा वित्तीय पदों के लिए तैयार किया जाए।


पानी मिलने से उत्पादन बढ़ सकता है, पर अपने आप शुद्ध आय नहीं बढ़ती। यदि सब्जियाँ समय पर एकत्र नहीं हुईं, छँटाई और भंडारण नहीं हुआ या खरीदार कम हैं, तो अच्छी पैदावार के बाद भी किसान को नुकसान हो सकता है। इसलिए हर क्लस्टर का जल, फसल, प्रसंस्करण, पशुधन या मत्स्य गतिविधि, उत्पादक समूह, परिवहन और बाज़ार से जुड़ा व्यावसायिक खाका तैयार हो। महिला उत्पादक समूह और किसान उत्पादक कंपनियाँ मोलभाव की क्षमता बढ़ा सकती हैं, पर पंजीकरण से अधिक जरूरी हैं विश्वसनीय हिसाब, गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी खरीदार और समय पर भुगतान। सफलता का पैमाना समूहों की संख्या नहीं, सभी खर्च घटाने के बाद महिला किसान की वास्तविक कमाई होनी चाहिए।


डिजिटल कृषि भी तभी उपयोगी होगी जब वह खेत और बाज़ार के निर्णय सरल बनाए। प्रस्ताव में एक लाख प्रतिभागियों को बुनियादी व्यावहारिक डिजिटल प्रशिक्षण, 20 हजार को उन्नत प्रशिक्षण और लगभग पाँच हजार महिलाओं को कृषि सखी, सिंचाई तकनीशियन, डेटा प्रबंधक तथा मूल्य-शृंखला समन्वयक के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘अन्नदा लाइव’ नामक प्रस्तावित व्यवस्था सिंचाई की उपलब्धता, फसल की स्थिति, संभावित कटाई, खरीदारों की माँग और बिक्री के आँकड़ों को जोड़ सकती है। फिर भी स्मार्टफोन न होने, इंटरनेट महँगा होने या साक्षरता की कमी के कारण किसी महिला को बाहर नहीं किया जाना चाहिए। साझा उपकरण, स्थानीय भाषा, ऑफलाइन सहायता, सहमति पर आधारित डेटा और निजता की सुरक्षा अनिवार्य हों।


इसके आर्थिक लाभ की संभावना बड़ी है, लेकिन अनुमान को उपलब्धि बनाकर प्रस्तुत करना अनुचित होगा। अवधारणा-पत्र में वार्षिक शुद्ध कृषि आय में 35–50 प्रतिशत वृद्धि का संकेतात्मक लक्ष्य है। यदि कार्यक्रम के परिपक्व चरण में भाग लेने वाले एक लाख परिवारों की शुद्ध वार्षिक आय औसतन ₹35,000 से ₹50,000 बढ़े, तो कुल अतिरिक्त वार्षिक शुद्ध आय लगभग ₹350–₹500 करोड़ बन सकती है। यह केवल एक संभावित परिस्थिति की गणना है; न तो प्रमाणित प्रतिफल और न ही सुनिश्चित वादा। आय के साथ जल-उत्पादकता, ऋण का बोझ, पोषण, महिलाओं की निर्णय-क्षमता, समय की बचत और परिसंपत्तियों की टिकाऊ स्थिति भी मापनी होगी।


सार्वजनिक वित्त के उपयोग में भी पारदर्शिता आवश्यक है। पाँच वर्ष के संकेतात्मक ₹1,850 करोड़ में जल-संरचनाएँ, प्रशिक्षण, डिजिटल सेवाएँ, बाज़ार सहायता, सामुदायिक कर्मी और रखरखाव के मद अलग-अलग दिखने चाहिए। दूसरी योजनाओं के संसाधनों को दो बार गिनना नहीं चाहिए। पहले चुनिंदा जल-असुरक्षित और सामाजिक रूप से वंचित क्लस्टरों में विश्वसनीय आधाररेखा के साथ परीक्षण किया जाए; जहाँ संभव हो, तुलना के लिए उपयुक्त क्षेत्र चुने जाएँ। हर छह महीने प्रगति सार्वजनिक हो, स्वतंत्र मूल्यांकन हो और असर सिद्ध होने पर ही विस्तार हो। यह कोई प्रचार कार्यक्रम नहीं, सीखते हुए बेहतर बनने वाला कृषि निवेश होना चाहिए।


महाराष्ट्र के नए अधिनियम, उमेड़ के एकीकृत खेती क्लस्टरों और विश्व बैंक समर्थित जलवायु-सहनशील कृषि कार्यक्रम से अनेक सीख मिलती हैं। नवंबर 2025 में विश्व बैंक ने महाराष्ट्र की पोक्रा परियोजना के दूसरे चरण के लिए 49 करोड़ अमेरिकी डॉलर के वित्तपोषण की घोषणा की। इसमें 20 लाख से अधिक छोटे व सीमांत किसानों, जिनमें लगभग 2.9 लाख महिलाएँ हैं, तक पहुँचने और आय में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य बताया गया है। ये भविष्य के लक्ष्य हैं, सिद्ध उपलब्धियाँ नहीं। पश्चिम बंगाल को किसी अन्य राज्य की नकल करने के बजाय अपनी पंचायतों, आनंदधारा संस्थाओं, जलविज्ञान और स्थानीय बाज़ारों के अनुरूप पहचान, जल, कौशल और उद्यम का समन्वित मॉडल बनाना चाहिए।


राज्य के कृषि, जल संसाधन अन्वेषण एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वित्त, आनंदधारा, महिला कृषकों तथा स्वतंत्र जल एवं बाज़ार विशेषज्ञों का छोटा तकनीकी समूह अन्नदा की जाँच और उपयुक्त पायलट क्षेत्रों का चयन कर सकता है। विश्व बैंक, इफाड, यूएनडीपी और उत्पादक उद्यम के अनुभवी संस्थानों से उनके कार्यक्षेत्र के अनुरूप संभावित सहयोग पर चर्चा की जा सकती है; किसी पूर्व-स्वीकृत साझेदारी की धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए। डेवलपमेंट कनेक्ट्स सामान्य सरकारी प्रक्रियाओं के अधीन जल संसाधन नियोजन, भौगोलिक सूचना, डिजिटल प्रणालियों, क्षेत्रीय सीख और निगरानी में सहयोग देना चाहेगा। सार्वजनिक निर्णय और जवाबदेही राज्य के ही पास रहनी चाहिए।


बंगाल को किसी नई सब्सिडी का आकर्षक नाम नहीं चाहिए। उसे ऐसी महिला किसान चाहिए जिसके श्रम को पहचान मिले, पानी का भरोसा हो, सामूहिक संस्था में उसकी आवाज़ सुनी जाए, डिजिटल साधन उसके काम आएँ और फसल बेचने के बाद उसे पता हो कि वास्तव में कितना लाभ हुआ। सम्मान और कृषि अर्थशास्त्र को अलग नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक परीक्षण, ईमानदार लेखे और सार्वजनिक जवाबदेही के साथ अन्नदा महिला किसानों की क्षमता और राज्य की कृषि समृद्धि के बीच एक व्यवहारिक सेतु बन सकती है।


तथ्य समीक्षा: 12 अक्टूबर 2026 तक। अन्नदा के लक्ष्य प्रस्तावित हैं, स्वीकृत वित्त या प्राप्त उपलब्धियाँ नहीं।


स्रोत: Maharashtra Government Gazette, 22 July 2026. Maharashtra Women Farmers Empowerment Act, 2026 (Act XLVI of 2026). https://prsindia.org/files/bills_acts/acts_states/maharashtra/2026/Act46of2026MH.pdf | Loksatta, 7–8 October 2026. Woman Farmer Certificate applications and issuance; figures attributed to Maharashtra Agriculture Minister. https://www.loksatta.com/mumbai/mahila-shetkari-pramanpatra-registration-stalled-due-to-code-of-conduct-css-98-6178670/ | Department of Agriculture, Government of West Bengal. Farm families, holdings and cropping intensity. https://agriculture.wb.gov.in/ | WBADMIP Phase II Project Implementation Plan, June 2024, p. 4. Regional single-cropping data. https://wbadmip.wb.gov.in/documents/PhaseII/PIP_June_2024.pdf | WBADMIP official programme history. Phase I irrigation potential and share of women beneficiaries. https://wbadmip.wb.gov.in/about | Anandadhara, WBSRLM project dashboard. Women farmers and community cadres, website observed October 2026. https://anandadhara.wb.gov.in/project_dashboard | Maharashtra UMED / MSRLM, Annual Action Plan 2025–26, p. 59. Approved and proposed Integrated Farming Clusters. https://umed.in/documents/AAP_2025_26.pdf | World Bank, 25 November 2025. PoCRA Phase II approval, intended reach and income objective. https://www.worldbank.org/en/news/press-release/2025/11/25/india-world-bank-approves-two-projects-to-improve-learning-outcomes-and-increase-farmers-incomes-using-digital-solutions | Development Connects, ANNADA: West Bengal Women Farmers’ Water Security, Digital Agriculture & Integrated Value Chain Mission. Trilingual Concept, September 2026; original programme targets. Internal proposal, Kallol Saha / Development Connects

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