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पोस्ट (11)
28 अप्रैल 2026 ∙ 5 मिनट
बुनकर का चाँद
बहुत समय पहले, एक गाँव में, जहाँ नदी चाँदी की पायल की तरह बल खाती हुई बहती थी, निमाई नाम का एक बुनकर रहता था। वह इतना महीन कपड़ा बुनता था कि हवा भी उसे छूने में शरमा जाती थी। उसकी साड़ियों में भोर के रंग, सरसों के खेतों की पीली आभा, तोते के पंखों की हरियाली और गीली मिट्टी की सौंधी महक होती थी। फिर भी निमाई गरीब ही रहा, क्योंकि वह ईमानदारी से बेचता था, मुक्त हाथों से दान देता था, और अक्सर विधवाओं, पुजारियों, घुमंतू गायकों और किसी भी ऐसे व्यक्ति से पैसे माँगना भूल जाता था, जो उसकी साड़ियों के...
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19 अप्रैल 2026 ∙ 4 मिनट
आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की एक स्पष्ट रूपरेखा
भारत महिलाओं के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का संवैधानिक संकल्प पहले ही कर चुका है। अब राष्ट्रीय दायित्व यह है कि इस संकल्प को एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से व्यवहार में बदला जाए, ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले यह उद्देश्य पूरी तरह साकार हो सके। कल्लोल साहा द्वारा भारत ने लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। महिलाओं को विधायिकाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने के सिद्धांत को देश ने स्वीकार कर लिया है। लोकसभा, राज्य...
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19 अप्रैल 2026 ∙ 5 मिनट
लोकसभा में परिसीमन और महिलाओं के कोटे पर बहस का नतीजा राजनीतिक गतिरोध के रूप में सामने आया
शुक्रवार, 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक बहसों में से एक का केंद्र बन गई, जब सदस्यों ने तीन आपस में जुड़ी हुई पहलों के एक पैकेज पर चर्चा की: संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026; परिसीमन विधेयक, 2026; और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026। सरकार ने तर्क दिया कि इस पैकेज का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करना था। लेकिन मुख्य संवैधानिक संशोधन सदन में पारित नहीं हो सका;...
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